MRP से ऊपर GST चार्ज करने का यह मतलब है कि दुकानदार आपको धोखा दे रहा है।

MRP से ऊपर GST चार्ज करने का यह मतलब है कि दुकानदार आपको धोखा दे रहा है। ऐसे में जानिए कि किस तरह आप MRP में सम्मिलित टैक्स राशि पता कर सकते हैं।

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किसी भी वस्तु या सेवा की एमआरपी में सभी तरह के टैक्स शामिल होते हैं। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि यदि कोई भी दुकानदार या सेवाप्रदाता आपसे एमआरपी के ऊपर जीएसटी चार्ज करता है तो यह गलत है। एमआरपी के ऊपर चार्ज की गई टैक्स राशि दुकानदार की जेब में जा रही है। एमआरपी का मतलब अधिकतम खुदरा मूल्य (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) होता है, इस कीमत में सभी तरह के टैक्स आदि शामिल होते हैं। किसी भी प्रोडक्ट की एमआरपी सभी तरह के टैक्स को सम्मिलित करके ही तय की जाती है।

ऐसे जोड़ें कितने का सामान कितना टैक्स
चार्टेड एकाउंटेंट अंकित गुप्ता से जब एमआरपी और जीएसटी के संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि कैसे एमआरपी में जीएसटी की राशि जोड़ें। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए आपने चॉकलेट का पैकेट खरीदा है। इसका MRP 100 रुपये है। इस पर पांच फीसद जीएसटी लगता है। तो इसका अर्थ यह है कि 100 रुपए में 5 फीसद जीएसटी की दर भी शामिल है। आपके सामान की असल कीमत (100/105 X 100= 95.23) 95.23 रुपए हुई। वहीं, अगर इस चॉकलेट के पैकेट पर 12 फीसद जीएसटी है और MRP 100 रुपये है, तो इसकी कीमत (100/112 X 100 = 89.28) 89.28 रुपए हुई और बाकी का हिस्सा जीएसटी का हुआ।

एमआरपी और मूल्य में होता है अंतर
ध्यान रहे एमआरपी और किसी वस्तु के मूल्य में अंतर होता है। जैसे किसी रेस्त्रां के मैन्यु कार्ड में दर्शाए गए दाम उस वस्तु का एमआरपी नहीं होती है। ऐसे में बिल के समय पर जीएसटी इस कीमत के ऊपर ही लगेगा। इसी तरह अगर कोई सेवा प्रदाता आपको कोई सेवा देता है और उसने आपको केवल उस सेवा के बदले दी जाने वाली राशि ही बताई है तो इस सेवा के अतिरिक्त जीएसटी लगाया जाएगा। केवल एमआरपी की स्थिति में ही जीएसटी की राशि सामान या सेवा के साथ शामिल होती है।

कहां होती है गड़बड़
अगर कोई दुकानदार आपको सामान की एमआरपी पर जीएसटी लगाकर बिल दे रहा है तो यह पूरी तरह गलत है। आप इस बिल पर असहमति दर्ज कीजिए। कई बार हम भुगतान करते समय बिल पर ध्यान नहीं देते और एमआरपी के ऊपर टैक्स देकर दो बार टैक्स दे जाते हैं।

Source Jagran

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