खराब आदतों की वजह से होती है दांतों की तकलीफ, ध्यान रखिए ये बातें

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सम्पूर्ण सेहत के लिए मुंह की सेहत बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। पोषण और दांतों (teeth) की सेहत साथ-साथ चलते हैं। मुख की सेहत को शरीर का आइना भी कहा जाता है। अगर आहार में शरीर की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों में कमी है, तो मुख को संक्रमण से लड़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दांतों की सेहत कई मामलों में आहार से जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए, पोषण की कमी का मुख के संक्रमण वाली बीमारियों पर प्रभावी पड़ता है। कुपोषण पीरियोडॉन्टल और मुख के संक्रमण की बीमारियों को बढ़ा सकता है।

शक्कर बन सकती दांतों में सड़न की वजह
खराब आहार की वजह से मसूड़ों की बीमारी और दांत में सड़न हो सकती है। ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्स, शक्कर और स्टार्च वाले खाद्य प्लाक एसिड्स के उत्पादन को बढ़ावा देते हैं जो दांत के इनेमल पर हमला करते हैं। अंततः ये एसिड्स दांत के इनेमल के टूटने की वजह बनते हैं, जिससे कैविटी होती है। ऐसा खाना जिसमें किसी भी प्रकार की शक्कर मौजूद होती है, उनसे दांत में सड़न आ सकती है।

गलत खान-पान हैं दातों में खराबी की वजह:
आहार संबंधी आदतों के साथ ही आज सामान्य जीवनशैली में भी गंभीर विसंगतियां देखने को मिलती हैं। युवा शक्कर की अधिक मात्रा वाला सोडा, मीठे फूट ड्रिंक्स, और अस्वास्थ्यकर स्नैक्स खा रहे। हैं, जो दांतों को प्रभावित करते हैं। बचपन और किशोरावस्था में खाने की आदतों और विकल्प तय करते हैं कि युवावस्था में दातों में कितनी जल्दी सड़न आ सकती है।

ध्यान रखिए ये बातें भी

  • बच्चा सोने से पहले दूध पीए, तो उसे कुल्ला करके ही सोने जाने दें। दूध या जूस में मौजूद शक्कर से दांतों के खराब होने की गति बढ़ जाती है।
  • माना कि बच्चे के प्राथमिक दांत या दूध के दांत गिरने वाले हैं लेकिन ऐसे में बच्चे के मुख के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। बच्चे चॉकलेट बहुत खाते हैं लेकिन मिल्क चॉकलेट कैरेमलाइज्ड चॉकलेट या ट्रॉफी की तुलना में दांतों के लिए बेहतर है।
  • खाने के बाद कुल्ला करवाना और रोजाना दो बार अच्छे टूथपेस्ट से ब्रश करना बहुत जरूरी है। ब्रश मुलायम और मल्टी टुपटेड और नायलॉन ब्रिसल्स वाला होना चाहिए। ब्रश का सिरा मुलायम हो ताकि वह मुंह के सभी हिस्से की आसानी से सफाई कर सके।
  • दांतों के बीच के हिस्से की दिन में एक बार फ्लॉस से सफाई करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा अधिक मीठे खाने और पीने की चीजों से बचना चाहिए। समय-समय पर चेकअप कराना चाहिए।
  • फॉस्फोरस से प्रचुर खाने के सामान, जैसे कि मीट, पोल्ट्री, मछली, दूध और अंडे दांतों को मजबूत करने में मदद करते हैं और इनमें भरपूर प्रोटीन होता है।

आहार संबंधी ये आदतें रोकेंगी दांतों की तकलीफों को

  • फल और सब्जियां संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और ये दांतों के लिए भी अच्छे हैं। चूंकि इनमें पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए ये उस शक्कर को संतुलित करने में मदद करते हैं जो इनमें होती है। साथ ही दांतों को साफ करने में मदद करते हैं। इन्हें चबाने से भी सलाइवा के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है, जो हानिकारक एसिड को धोता है और खाने के टुकड़ों को दांतों से अलग करता है।
  • भले ही अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन ज्यादातर खाने की मीठी चीजों के साफ तौर पर नुकसान पहुंचाने की बात करती है, लेकिन इनमें कुछ अपवाद भी हैं। फल, जैसे कि सेब मीठे हो सकते हैं, लेकिन इनमें फाइबर और पानी की भारी मात्रा भी होती है। सेब खाने से मुख में सलाइवा का निर्माण होता है, जो बैक्टीरिया और खाने के कणों को अलग कर देता है।
  • नट्स में वे प्रोटीन और मिनरल्स होते हैं जो संपूर्ण सेहत के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, वे नट्स जिनमें कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा कम होती हैं, वे कैविटीज़ के जोखिम को नहीं बढ़ाते हैं। दांत में सड़न एसिड पैदा करने वाले बैक्टीरिया से आती है, जो कार्स द्वारा सक्रिय होते हैं। एक अन्य फायदा यह है कि नट्स चबाने से सलाइवा के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, जो दांत में सड़न आने के जोखिम को घटा सकते हैं।
  • अजवायन भी गाजर और सेब की तरह, काफी हद तक टूथब्रश की तरह काम करती है, आपके दांतों से खाने के कणों और बैक्टीरिया को दूर करती है। यह आपके मसूड़ों की सेहत को बढ़ावा देने वाले दो एंटीऑक्सीडेंट्स विटामिन ए और सी, का अच्छा स्रोत भी है।
  • अपने आहार में ज्यादा पत्तेदार हरी सब्जियां, डेयरी उत्पाद और फाइबर वाली सब्जियां शामिल करने के साथ ही, आप जो पी रहे हैं उस पर भी ध्यान दें। चूंकि पानी में बिल्कुल भी कैलोरी या शक्कर नहीं होती है, इसलिए यह सर्वश्रेष्ठ है। जब एक सेहतमंद मुस्कान की बात की जाए, तो आहार एक बड़ा अंतर ला सकता है।