जानें दांतों की सेंसिटिविटी से जुड़ी भ्रांतियां और सच

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दांतों में सेंसिटिविटी दांतों की एक सामान्य समस्या है जो समय के साथ बढ़ती है। यह मसूड़ों तथा दांतों के इनैमल के घिसने के कारण होती है। यह समस्या तब बढ़ने लगती है जब इनेमल घिसकर दांतों के अंदर के मुलायम हिस्से ‘डेंटाइन तक पहुंच जाता है। डेंटाइन इनैमल और मसूड़ों के नीचे स्थित होते हैं। जब डेंटाइन बाहर आ जाता है, तब बाहरी चीजें जैसे कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम आदि दांतों के अंदर की नसों को उत्तेजित करते हैं और आपको ठंडे-गर्म के एहसास के साथ दांत की सेंसिटिविटी की तकलीफ होती है।

दांतों की सेंसिटिविटी से जुड़ी भ्रांतियां और सच

भ्रांति 1: दांतों की सेंसिटिविटी कैविटीज़ से होती हैं। सच : यह कभी-कभी ही होती है। हर मामले में नहीं। दांतों के सड़ने से तो सेंसिटिविटी होती ही है लेकिन दांतों के सड़े बिना भी सेंसिटिविटी हो सकती है। दांतों की सेंसिटिविटी मुख्यतः तब होती है जब दांतों का इनेमल घिस जाता है और मुलायम टिश्यू बाहर आ जाता है।

भ्रांति 2: सेंसिटिविटी केवल मीठा खाने से होती है। सच : डेंटाइन जब भी किसी गर्म-ठंडी, मीठी या नमकीन चीज के संपर्क में आता है तो नसों को उत्तेजित कर सेंसेशन महसूस कराता है।

भ्रांति 3 – दांतों की सेंसिटिविटी कुछ समय ही रहती है। सच : सेंसिटिविटी आती-जाती रहती है लेकिन यदि दांतों की सेंसिटिविटी का इलाज न कराया जाए तो यह आपके दैनिक जीवन में बाधा डालती है। दांतों की सेंसिटिविटी डेंटाइन के बाहर आने से होती है जो स्थायी रूप से भी हो सकती है क्योंकि इनेमल में कोई भी जीवित कोशिका नहीं होती है।

भ्रांति 4: खाने के बाद ब्रश करना अच्छी आदत है। सच : ब्रश करना न केवल दांतों के लिए बल्कि आपके मसूड़ों और जीभ के लिए भी अच्छा है। लेकिन खाने या पीने के बाद आपके दांतों की बाहरी परत कुछ समय के लिए मुलायम हो जाती है। खाने या पीने के फौरन बाद ब्रश करने से ये एसिड इनैमल को घिस देते हैं और उसे तोड़कर सेंसिटिविटी बढ़ा देते हैं। इसलिए खाने-पीने के कम से कम आधे घंटे बाद ब्रश करें ताकि लार को एसिड को प्राकृतिक रूप से उदासीन करने के लिए समय मिले।

भ्रांति 5: सेंसिटिव दांत की समस्या का कोई इलाज नहीं। सच : सेंसिटिव दांतों की देखभाल जरूरी है। सेंसिटिविटी का कारण क्या है इस आधार पर डेंटिस्ट सेंसिटिविटी दूर करने के लिए विशेष डिसेंसिटाइजिंग टूथपेस्ट या वैकल्पिक तरीकों का सुझाव देते हैं।

भ्रांति 6: दांतों की सेंसिटिविटी पर समय का असर नहीं होता। सच: दांतों के इनेमल के लगातार घिसने से ही सेंसिटिविटी बढ़ती है। एक बार डेंटाइन के बाहर आ जाने के बाद खान-पान से जुड़ा सेंसेशन बढ़ ही जाता है।

भ्रांति 7 : सेंसिटिविटी का इलाज करने वाले टूथपेस्ट को कभी-कभी या फिर नियमित टूथपेस्ट के सप्लीमेटं की तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

सच : दांतों की सेंसिटिविटी (sensitivity of teeth) से उत्पन्न सेंसेशन में आराम लाने के लिए नियमित इस्तेमाल किए जाने वाले टूथपेस्ट को ऐसे टूथपेस्ट से बदल लेना चाहिए जो इस स्थिति में आराम देने के लिए बनाया गया हो।

अच्छी ओरल आदतें किस प्रकार बनाए रखें:
प्रतिदिन कम से कम दो मिनट के लिए दिन में दो बार ब्रश करें। ब्रश को बहुत जोर से या तेजी से नहीं चलाना चाहिए।

  • नियमित तौर पर फ्लॉस करें।
  • माउथवॉश का उपयागे करें।
  • शुगर फ्री च्युइंगम चबाएं।
  • अपनी जीभ साफ करें।
  • अन्नकणों को ठीक से कुल्ला करके निकाल दें।
  • कुकुरी सब्जियां खाएं।
  • दांतों को घिसे नहीं।
  • एसिडिक फूड या ड्रिक न लें।

यदि सेंसिटिविटी है तो ऐसे टूथपेस्ट का इस्तेमाल शुरू कर दें, जो सेंसिटिव दांतों के लिए बनाया गया हो।