नए साल से एक्सपायर्ड दवा की वापसी बंद, बाजार में हड़कंप

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इंदौर । दवा बाजार में 31 दिसंबर के बाद वो दवा वापस नहीं होगी, जिसकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी है। केमिस्ट एसोसिएशन ने यह ऐलान कर दिया है। जीएसटी की पेचीदगियों का हवाला देकर भेजी इस लिखित सूचना से शहर और आसपास के कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। केमिस्ट एसोसिएशन व्यापार की मजबूरी का हवाला दे रहा है, जबकि रिटेलर्स इसे होलसेलर्स की मनमानी करार दे रहे हैं। इस फैसले का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ने की आशंका है।

इंदौर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने शहर के सभी रिटेलर्स को पत्र भेजकर सूचना दी है कि दिसंबर तक का एक्सपायर्ड दवाओं का स्टॉक इसी महीने क्लियर कर दें। एक जनवरी 2018 से एक्सपायर्ड दवा की वापसी बंद हो जाएगी। एसोसिएशन ने व्यवस्था देते हुए होलसेलर्स को भी निर्देशित कर दिया है कि इस तारीख के बाद वे ऐसी दवा वापस नहीं लें।

एसोसिएशन के निर्देश के बाद फुटकर दवा तुरत-फुरत में पुराना स्टॉक निकालने में जुट गए हैं। निर्देश से दुकानदार नाराज भी हैं। रिटलर्स के मुताबिक दवा कारोबार में माना जाता रहा है कि औसतन 5 प्रतिशत माल एक्सपायर होकर वापस आता है। अब तक कभी भी ऐसी दवा को वापस लेने से इनकार नहीं किया गया। अब इस पर प्रतिबं लगा तो पूरे कारोबार का गणित ही बिगड़ जाएगा।

ग्राहकों को नुकसान
फैसले से निराश खेरची दवा विक्रेता साफ कह रहे हैं कि इसका असर आम ग्राहकों पर ही पड़ना है। यदि एक्सपायर्ड दवा वापस नहीं होगी तो कारोबार में अनैतिक तरीके जोर पकड़ेंगे। एक बात यह होगी कि घाटे से डरकर रिटेलर्स दवाओं का स्टॉक कम रखेंगे। नतीजा बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा हो जाएगी। दूसरा पुराना माल खपाने के लिए कई दुकानदार एक्सपायरी डेट की प्रिंट में भी हेरफेर करने लगेंगे। एक्सपायर्ड माल का घाटा पाटने के लिए रिटेल में कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। शहर के थोक दवा बाजार से ही पूरे प्रदेश में माल सप्लाय होता है। लिहाजा यहां का फैसला एक साथ पूरे प्रदेश को प्रभावित करेगा।

करोड़ों का माल फंसा
केमिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक शहर में करीब 900 बड़े होलसेलर्स हैं। हर एक के गोदाम में कम से कम 10 लाख की एक्सपायर्ड दवाएं पड़ी हैं। कंपनियां दवा वापस लेने से इनकार भी नहीं कर रहीं लेकिन दवाओं के बदले क्रेडिट नोट भी जारी नहीं कर रहीं। इससे पूंजी फंस गई है और घाटा सहकर व्यापार करने होलसेलर्स के लिए संभव नहीं रहा। जीएसटी के नियम दवा वापसी बाधा बन रहे हैं। अब तक माल वापस ले रहे थे कि सरकार नीति नियमों में सुधार करेगी। अब मजबूरी में निर्णय लेना पड़ा है।

Source Jagran

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