क्यों होती है फ़ूड पोइजनिंग, जाने कारण और बचाव के घरेलु उपाय

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फ़ूड पोइजनिंग तब होती है जब अप ऐसे भोजन का सेवन करते हैं जो बैक्टीरिया, वाइरस, दूसरे रोगाणुओं या विषैले तत्वों से संक्रमित होता है। बच्चे और बुजुर्ग फूड पॉइजनिंग के शिकार अधिक होते हैं क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। फ़ूड पॉइजनिंग के अधिकतर मामलों में स्टेफायलोकोकस या ई. कोलाई बैक्टीरिया का संक्रमण पाया जाता है। यह रक्त, किडनी और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसके अलावा सालमोनेला, स्टेफाइलोकोकाई और क्लॉसट्रिडियम चोट्यूलियम जैसे रोगाणु भी खाद्य पदार्थों को संक्रमित करते हैं। क्लॉसट्रिडियम बॉट्यूलियम द्वारा उत्पन्न संक्रमण को गंभीर फूड मॉइजनिंग माना जाता है, क्योंकि इसमें रोगाणु सीधे तंत्रिका तंत्र पर हमला करते हैं। फूड पॉइजनिंग के लक्षण खाना खाने के 2 ने 6 घंटे के बाद दिखाई देने लगते हैं।

सामान्य लक्षण
पेट में दर्द और मरोड होना डायरिया (कभी-कभी दस्त के साथ खून आना)। सिरदर्द, चक्कर आना, जी मचलाना और उल्टी होना। ठंड लगकर बुखार आना। आंखों के आगे धुंधलका छा जाना। बेहोशी।

गम्भीर लक्षण
साँस लेने में तकलीफ होना। पेट फूलना। आंखों और त्वचा का पीला पड़ना। जोड़ों में सूजन। खून की उल्टियां होना।

संक्रमण के कारण…

  • पशु और मानव मल द्वारा संक्रमित पानी को फसलों को उगाने और सिंचाई के लिए उपयोग में लाना।
  • प्रोसेसिंग के दौरान मांस, मछली, चिकन का बैक्टीरिया के संपर्क में आना।
  • शौच के बाद हाथों को ठीक तरीके से ना धोना। ।
  • खाना बनाने-खान के बर्तनों का गंदा होना।
  • डेयरी उत्पादों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर खना।
  • फ्रोजन चीजों को उचित तापमान पर स्टोर नहीं करना।
  • कच्ची सब्जियों और फलों को ठीक तरह से धोए बिना इस्तेमाल करना।
  • अधपके मांस या अंडे का सेवन करना।
  • संक्रमित और गंदे जल का सेवन करना।
  • आवश्यकता से अधिक खाना।

बचाव के लिए उपरोक्त मामलों से बचते हुए यह भी ध्यान रखें के एक्सपाइरी डेट के खाद्य पदार्थों का सेवन न करें तथा पानी की स्वच्छता का ध्यान रखें। उपचार के लिए प्राथमिक लक्षण देखते ही डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। विलम्ब होने और गंत्रिका तंत्र को नुकसान होने पर यह जानलेवा हो सकता है।

घरेलु नुस्खा
फूड पॉइजनिंग का लक्षण दिखाई दे रहा हो तो अदरक की चाय का सेवन तत्काल शुरू कर दें।