आपका बच्चा लोगों में जाने से कतराता है तो अपनाये ये टिप्स

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टेक्नोलॉजी के इस दौर में आज बच्चे भले ही ऑनलाइन दोस्ती को ज्यादा तवज्जो देते हों, लेकिन फिर भी उनका सामाजिक और शारीरिक रूप से सक्रिय होना बेहद ही आवश्यक है। आपको शायद पता न हो कि सामाजिक रूप से सक्रिय (सोशली एक्टिव) बच्चे ज्यादा आत्मविश्वासी होते हैं और उन्हें जीवन के किसी भी मोर्चे पर निराशा का मुंह नहीं देखना पड़ता।

ज्यादातर बच्चों में सामाजिक योग्यता खुद विकसित नहीं होती है, इसके लिए अभिभावकों को अतिरिक्त मेहनत करने की आवश्यकता होती है। अगर आपका बच्चा भी लोगों के बीच जाने से कतराता है अथवा लोगों के बीच होकर भी अकेला रहता है, तो आप ये तरीके अपनाकर उसे सामाजिक रूप से सक्रिय बना सकते हैं…

घर से हो शरुआत

याद रखें कि किसी भी चीज की शुरुआत घर से ही होती है, इसलिए बच्चों को सामाजिक रूप से सक्रिय बनाने का पहला कदम भी आपका घर ही होना चाहिए। आप न सिर्फ बच्चे के साथ टाइम बिताएं, बल्कि उस समय आप उसके साथ बातें करें और किसी पारिवारिक गतिविधियों में शामिल करें या आप भी कोई टीम बेस्ड गेम खेल सकते हैं। कोशिश करें कि इस दौरान परिवार के सदस्य भी गैजेट्स से दूरी बनाकर रखें। आपका साथ बच्चे के मन में न सिर्फ आत्मविश्वास जगाएगा, बल्कि इससे उसे एक एक्सपोजर मिलेगा। इसके साथ ही वह गैजेट्स की दुनिया से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया की खूबसूरती को समझने लगेगा।

एक्टिविटी का साथ

आपका बच्चा जिस एक्टिविटी को पसंद करता है, आप उसके जरिए भी उसके सामाजिक गुणों को विकसित करने की कोशिश कर सकते हैं। मसलन, आप उनकी पसंद की हॉबी क्लास में उन्हें शमिल करवाएं या फिर उस एक्टिविटी से जुड़ी हुई कोई वर्कशॉप या फिर किसी ग्रुप एक्टिविटी में अवश्य भाग लेने दें। इससे आपके बच्चे के मन में मौजूद हिचक काफी हद तक निकल जाएगी।

खुद बनें आदर्श

अगर आप अपने बच्चे के अंदर किसी गुण का समावेश करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आप स्वयं में उन आदतों को शुमार कीजिए। इसके लिए आप खुद भी सप्ताहांस पर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को टी-पार्टी अथवा डिनर के लिए बुलाएं। कभी-कभी उनके घर भी जाएं। आप चाहें, तो अपने बच्चे के जन्मदिन या उसकी किसी सफलता का उत्सव मनाने के लिए भी उसके दोस्तों को घर पर बुला सकते हैं।

संरक्षण एक हद तक

यह बात सही है कि प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चों को लेकर प्रोटेक्टिव होता है, लेकिन बच्चे के विकास के लिए आपको अपनी हदें भी तय करनी होती हैं। अगर आप हर समय उसे अपने आंचल में छिपाकर रखेंगी, तो वह दुनिया की धूप में चलना कभी भी नहीं सीख पाएगा, इसलिए अगर आपका बच्चा शर्मीले स्वभाव का है, तो उसे शर्मीला कहने की बजाय आप स्वयं उसके लिए आधार तैयार कीजिए। मसलन, उसे समझाइए कि लोगों से बातचीत करना और उनसे घुलना-मिलना उसके स्वयं के विकास के लिए बेहद आवश्यक है। इसके लिए आप बच्चे को पार्क आदि में ले जा सकते हैं और दूसरे बच्चों के साथ खेलने के लिए प्रोत्साहित भी कर सकते हैं।

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Source Amarujala

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