युवाओं में बढ़ रही है नशे की लत, कारण जानकर नहीं होगा विश्वास

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आजकल युवाओं में नशे की लत काफी बढ़ रही है। जिसके मुख्य कारण बढ़ता तनाव, दूषित खानपान, अकेलापन, बेराजगारी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। युवाओं में शराब पीने की लत तो बढ़ ही रही है साथ ही शराब पीकर बेहोश होने का नया चलन भी शुरू हो गया है। इस विषय में हाल ही में एम्स में आयोजित सम्मेलन में देशभर के कई चिकित्सा संस्थानों से पहुंचे डॉक्टरों ने युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर चिंता जाहिर की है।

इसके अलावा नशे की लत की बीमारियों के इलाज के लिए चिकित्सा सुविधा बढ़ाने की सरकार से अपील की। इस दौरान यह बात भी सामने आई कि टीबी के इलाज के तर्ज पर अब नशे के इलाज के लिए भी डॉक्टर अपने सामने पीड़ितों को दवा खिला रहे हैं। एम्स ने भी दिल्ली में ऐसे तीन सेंटर शुरू किए हैं, जहां नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति को क्लीनिक में ही दवा खिलाई जाती है। इसका मकसद नशे की लत से पीड़ित बच्चों व युवाओं को आपराधिक प्रवृत्ति से बचाना है।

इस सम्मेलन का आयोजन एम्स के मनोचिकित्सा विभाग और राष्ट्रीय ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर ने मिलकर शुरू किया। इस सम्मेलन के आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार चड्डा ने कहा कि दिक्कत यह है कि अब भी लोग नशे को बीमारी मानने को तैयार नहीं है। लोग इसे आदत मानते हैं। इस वजह से 90 फीसद मरीज इसका इलाज भी नहीं कराते। जबकि नशा के सेवन से गंभीर बीमारियां होती हैं। नशा सिर्फ आदत होती तो उसे लोग खुद ही कुछ समय पश्चात छोड़ पाने में सफल होते लेकिन यह देखा गया है कि कई लोग चाह कर भी नशा नहीं छोड़ पाते। इसका मतलब है कि यह सिर्फ आदत नहीं बल्कि मानसिक बीमारी है। हर तरह के नशे के इलाज का तरीका भी अलग है।

यह देखा गया है कि नशीली दवाओं का सेवन करने वाले लोग अपनी इच्छा को पूरी करने के लिए चोरी करने लगते हैं। इस तरह धीरे-धीरे उनमें आपराधिक प्रवृत्ति विकसित होने लगती है इसलिए सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल पर नशीली दवाओं का सेवन करने वाले पीड़ितों के इलाज के लिए क्लीनिक में ही वैकल्पिक दवा खिलाकर इलाज किया जा रहा है। एम्स ने त्रिलोकपुरी, सुंदर नगरी व कोटला मुबारकपुर में क्लीनिक शुरू किए गए हैं।

Source dailyhunt

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