अब छुट जाएगी धुम्रपान की लत, बस अपना लो इन 6 उपायों को

धूम्रपान की हानियों को जानने के बावजूद कई लोग इस आदत को छोड़ नहीं पाते। इस जानलेवा लत से छुटकारा पाने के लिए यहां कुछ उपाय दिए जा रहे हैं। |

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धूम्रपान के नतीजे बेहद खतरनाक होते हैं। धूम्रपान करने वालों में से 50 प्रतिशत की असमय मौत होती है। कैंसर की वजह से प्रति वर्ष होने वाली मौतों में से एक-चौथाई का कारण भी धूम्रपान ही है। इन तथ्यों को जानने के बावूजद इस लत से पीछा छुड़ाना कठिन होता है। यही कारण है कि आज भी दुनिया भर में लाखों-करोड़ों लोग धूम्रपान करते हैं और न जाने कितने ही लोग इस लत को चाहते हुए भी छोड़ नहीं पा रहे हैं। इस लत से बचने के लिए कुछ उपाय बता रहे हैं।

1. अचानक छोड़ दें।
यह कठिन परंतु असरदार तरीका है। हालिया अध्ययन दर्शाते हैं कि अचानक धूम्रपान छोड़ने वालों की सफलता दर उन लोगों की तुलना में 25 प्रतिशत बढ़ जाती है जो धीरे-धीरे इसे छोड़ने का प्रयास करते हैं। यदि आप भी ऐसा करना चाहते हैं तो एक दिन तय कर लें और कड़ाई से अपने फैसले पर टिके रहें । ऐसा दिन न चुनें जब पार्टियां ज्यादा होनी हों या दफ्तर में काम का दबाव ज्यादा रहता हो।

‘एक भी कश नहीं’ के नियम का आपको सख्ती से पालन करना होगा जब तक कि धूम्रपान के लिए आपकी तलब खत्म न हो जाए। आमतौर पर यह तलब 5 मिनट तक रहती है इसलिए ऐसे मौके पर 5 मिनट तक अपना ध्यान भटकाने के लिए पहले ही योजना बना कर रखें। |

2, पैच, गम तथा लॉजेंज ।
निकोटीन रिप्लेसमैंट थैरेपी (एन.आर.टी.) व्यक्ति को अन्य स्रोतों से निकोटीन की आपूर्ति करती है ताकि धूम्रपान छोड़ने में मदद हो। इन दिनों एन.आर. टी. पैच, गम, लॉजेंज, इन्हेलर आदि कई रूपों में उपलब्ध है।

अध्ययन बताते हैं कि एन.आर.टी. का प्रयोग करने वालों के धूम्रपान छोड़ने की सम्भावनाएं दोगुना हो जाती हैं। हालांकि, इसका एक नुक्सान है कि इसकी आदत पड़ने का जोखिम भी रहता है।

चूंकि अकेला निकोटीन सिगरेट में पाए जाने वाले टार तथा कार्बन मोनोऑक्साइड से कम नुक्सानदायक होता है, एन.आर.टी. धूम्रपान से कहीं ज्यादा सुरक्षित है। इसकी आदत न पड़े इसलिए लम्बे वक्त तक इसके प्रयोग से बचें।

3. ई-सिगरेट
ई-सिगरेट सभी डिजाइन्स तथा फ्लेवर्स में उपलब्ध हैं परंतु उनके सुरक्षित होने को लेकर विवाद रहा है। जानकारों के अनुसार ई-सिगरेट पूर्णतः नुक्सानरहित नहीं हैं परंतु सिगरेट की तुलना में वे बहुत कम खतरनाक हैं क्योंकि उनमें सिगरेट की तरह टार, कार्बन मोनोऑक्साइड तथा अन्य खराबियों नहीं होती हैं। फिर भी ई-सिगरेट का प्रयोग सतर्कता से तथा सीमित अवधि के लिए करें।

4. सम्मोहन चिकित्सा
बेशक यह अजीब लगे, सम्मोहन चिकित्सा यानी हिप्नोथैरेपी ने हजारों लोगों की सिगरेट छुड़वाई है । धूम्रपान करने वाले 6 हजार लोगों के अध्ययन में उनकी आदत छुड़वाने में सम्मोहन की सफलता दर सबसे ज्यादा पाई गई। एक सम्मोहन थैरेपी विशेषज्ञ के अनुसार निकोटीन को शरीर से जाने में कुछ वक्त लगता है और तब तक इंसान को कश लगाने की तलब होती रहती हैं। सम्मोहन इसी तलब से निपटने में उनकी मदद करता है।

5. पहेली सुलझाएं
एक अध्ययन के अनुसार तीन मिनट के लिए वीडियो पजल गेम ‘टेटिस’ खेलने से सिगरेट की तलब खत्म हो सकती है। कुछ मिनट तक लगी रहने वाली तलब से ध्यान भटकाने में ऐसी पहेलियां मदद करती हैं।

6. कॉफी छोड़े
निकोटीनन लेने से व्यक्ति को बेचेनी या घबराहट महसूस होती है परंतु कॉफी में पाए जाने वाले कैफीन जैसे तत्व हालत और बिगाड़ सकते हैं। एक अध्ययन में यह भी पाया गया था कि कॉफी सिगरेट के स्वाद को बेहतर कर देती है।

सिगरेट छोड़ने पर क्या होता है?

  • 20 मिनट बाद दिल की धड़कन सामान्य होने लगती है।
  • 8 घंटे बाद ऑक्सीजन स्तर सामान्य होने लगता है और निकोटीन तथा कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा आधी रह जाती हैं।
  • 48 घंटे बाद शरीर से निकोटीन पूरी तरह खत्म हो जाता है और चखने तथा सूंघने की क्षमता सुधर जाती है। हार्ट अटैक होने का जोखिम भी कम होने लगता है।
  • 2 से 12 सप्ताह में रक्तप्रवाह सुधारने लगता है।
  • 3 से 9 महीने बाद फेफड़ों की कार्यक्षमता में 10 प्रतिशत सुधार होता है।
  • 1 वर्ष बाद दिल के रोगों का खतरा धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की तुलना में आधा रह जाता है। |
  • 10 वर्ष बाद फेफड़ों के कैंसर का खतरा धूम्रपान करने वालों की तुलना में आधा रह जाता है।
  • 15 वर्ष बाद हार्ट अटैक का खतरा उतना ही रह जाता है जितना धूम्रपान न करने वाले को।