माइग्रेन से छुटकारा पाने के रामबाण उपाय

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आपको इतना तेज सिरदर्द हो रहा है कि आपके लिए असहनीय है और इस दौरान रोशनी शोर को सहन नहीं कर पा रहे हैं, सिरदर्द के कारण आपको कमजोरी महसूस हो रही है, ध्यान केंद्रित करने में समस्या आ रही है उल्टी आने के बाद ही आपके सरदर्द में कमी आती है, तब यह सनिश्चित है कि माइग्रेन(migraine) के शिकार हो चुके हैं। माइग्रेन के दर्द से आराम के लिए तेलों मसाज तकनीकों और दवाइयों का सहारा लिया जाता है।

इन तेल का करते हैं प्रयोग

  • कपूर का तेल।
  • अजवाइन का तेल।
  • ब्राम्ही नैल।
  • नारायणी तेल।

मसाज की तकनीक और प्रेशर प्वाइंट

  1. अंगुलियों से भौहों के ऊपर, आंखों के नीचे दबाएं।
  2. अंगुलियों से आगे से पीछे की ओर खोपड़ी की मसाज करें।
  3. अंगूठे और तर्जनी अंगुली के बीच दबाएं और इसके साथ सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें।
  4. आंखों के किनारों पर ऊपर माथे की ओर उन बंदुओं को तर्जनी अंगुली से दबाएं और फिर अपनी नर्जनी उंगली को वृत्ताकार रूप में घुमाएं।
  5. गर्दन के पीछे स्पाइन पर अंगूठे और तर्जनी भंगुली से ऊपर से नीचे की ओर दबाएं।
  6. पैर के अंगूठे के नीचे तलवे पर दबाएं।

माइग्रेन से राहत के लिए आयुर्वेद में शिरोधारा, शिरोपिचु शरोबस्ती और नायसा जैसी थैरेपी हैं।

शिरोधारा : कंपन के साथ माथे पर तेल डाला जाता है। इसमें ब्राह्मी, जटामासी और तिल आदि के तेल का स्तेमाल करते हैं। यह मानसिक तनाव कम करने, गहरी नींद लेने में सहायक और सिरदर्द से राहत देती है।

शिरोपिचु : शिरोपिचु एक प्रक्रिया है जिसमें कॉटन की पट्टी को मेडिकेटेड घी या तेल में डुबोया जाता है। भौर सिर पर बांध दिया जाता है।

शरोबस्ती : इस प्रक्रिया में सिर के आसपास एक ट्टिा बांधा जाता है और क्षेत्र के बीच में तेल रखते हैं।

नस्या : मेडिकेटेड ऑइल को नाक में डाला जाता है, जो माना जाता है कि मस्तिष्क तक पहुंचता है और इंत्रिकाओं को शांत करता है।