14 साल की बच्ची को बनाया माँ, फिर उसके साथ करता था ऐसा काम

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ये कहानी उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले की 14 साल की बच्ची प्रिया की है। लोहियापुरम मोहल्ले में अपनी विधवा मां के साथ रह रही है। घर से दो घर दूर रहने वाले संजय ने बहला-फुसलाकर प्रिया के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने संजय को गिरफ्तार तो किया, लेकिन वह जमानत पर रिहा हो गया और अब प्रिया के घर आकर उसके परिवार को धमका रहा है। इधर प्रिया गहरे सदमे में है। पहले जिस गली में वह अपनी सहेलियों के साथ खेलती थी वहां पर अब कोई उससे बात तक नहीं करता।

दुष्कर्म की घटना के कुछ महीनों बाद एक दिन उसके पेट में तेज दर्द होने लगा तो मां उसे डॉक्टर के पास ले गई। वहां पता चला प्रिया चार माह का गर्भ से है। मां ने जब उससे मारपीट की तो प्रिया ने पूरी बात बताई। प्रिया की मां जब अपनी बेटी को लेकर संजय के घर पहुंची तो पहले उसके मां-बाप ने उसे समझा-बुझाकर वापिस लौटा दिया। और ये भी दिलासा दिया कि इनकी शादी करवा दी जाएगी। लेकिन बाद में ये कहकर अपनी बात से मुकर गए कि लड़की पासी जाति की है और लड़का कुशवाहा। छोटी जात की लड़की से ब्याह नहीं हो सकता है ।

यह घटना पिछले साल जुलाई की है। प्रिया की मां उसे जुलाई में अस्पताल ले गई थी। डॉक्टरों से नाबालिग बेटी का अबॉर्शन करवाने के लिए बहुत मिन्नतें की, लेकिन डॉक्टरों ने यह कह कर साफ मना कर दिया की अबॉर्शन का समय निकल चुका है, बेटी की जान को खतरा हो सकता है। 4 अगस्त, 2017 को वकील की सलाह पर प्रिया की मां ने पुलिस में जाकर FIR दर्ज करवाई। पुलिस ने संजय और उसके पिता को हिरासत में ले लिया। पिता को छोड़ दिया और संजय को लॉकअप में भेज दिया। संजय के परिवार वालों ने अपने बेटे को नाबालिग बताया। हालांकि प्रिया की मां कहती है कि संजय के परिवार वालों ने नाबालिग होने का प्रमाण-पत्र झूठा बनाया है। उनके अनुसार 3 अगस्त, 2011 को बने उसके आधार कार्ड में जन्म की तारीख 3 फरवरी, 1997 है। जबकि इस घटना के बाद 1 सितंबर 2017 को बने स्कूल के ट्रांसफर सर्टिफिकेट में 3 फरवरी, 2000 लिखवाई गई थी। यही वजह है कि संजय को आम जेल की बजाय किशोर जेल फैजाबाद भेज दिया गया। वहां चार-पांच महीने रहने के बाद वह जमानत पर छूट कर घर आ गया गया। पिछले दो महीने से वह खुलेआम धूम रहा है। प्रिया के लिए तो अब अपना घर ही जेल बन चूका है। 28 नवंबर को प्रिया ने बेटे को जन्म दिया। सेहत इतनी खराब हो गई थी कि उसका हीमोग्लोबिन 4 पॉइंट पहुंच गया था। उसकी जान बचाने के लिए 1000 रुपए देकर दो बोतल खून खरीदकर चढ़ाना पड़ा था। बच्ची घर तो लौट आई थी लेकिन अब बाहर नहीं निकलती। पहले जिस गली में वह अपनी सहेलियों के साथ खेलती थी अब कोई उससे बात तक नहीं करना चाहता है। इतना ही नहीं संजय प्रिया के परिवार वालों को धमकियां भी दे रहा है। प्रिया की मां को डराने के लिए उन पर 12 हजार रुपए की उधारी का इल्जाम भी लगाया है। वह जानता है प्रिया की मां इतने पैसे कहां जुटा सकती है। शायद इसी डर से वह केस वापस ले ले।
(नोट – नाबालिग लड़की और आरोपी का नाम बदला गया है)