अमरीका को उत्तर कोरिया ब्लैकमेल कर रहा है

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उत्तर कोरिया से अमरीका कभी भी बिना किसी शर्त के बातचीत के लिए तैयार है. ये पेशकश अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने की है.

अमरीका पहले से ये कहता रहा था कि उत्तर कोरिया जब तक अपना परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम नहीं छोड़ेगा, उससे बातचीत नहीं होगी लेकिन अब अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन के बयान को उत्तर कोरिया पर अमरीकी नीति में इस बयान को एक बड़े बदलाव की तरह देखा जा रहा है.

उत्तर कोरिया पर अमरीकी नीति में इस बयान को एक बड़े बदलाव की तरह देखा जा रहा है. अमरीका और उत्तर कोरिया के दरमियां इस बीच दो चीज़ें हुई हैं. पहले तो कूटनीतिक कोशिशों का एकमात्र मक़सद यही हुआ करता था कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करे.

लेकिन अब उनका हथियार कार्यक्रम वैज्ञानिक और तकनीकी लिहाज से पिछले एक साल में काफी विकसित हो गया है. उत्तर कोरिया का हथियार कार्यक्रम पहले की तुलना में अब ज्यादा दूर तक और अचूक तरीके से मार कर सकता है. अमरीका का पश्चिमी तट अब उत्तर कोरिया की मारक क्षमता की रेंज में है.

ट्रंप का आक्रामक रुख

अमरीका मजबूरन एक ऐसे हालात में आ गया है, जहां वह जंग भी नहीं छेड़ सकता और और अगर युद्ध छिड़ गया तो इस बात की संभावना है कि उत्तर कोरिया गुआम या अलास्का जैसे अमरीकी ठिकानों पर हमला कर सकता है. इस वजह से अमरीका को मजबूरन हकीकत को कबूल करना पड़ रहा है.

दूसरी बात ये है कि अमरीका के ऊपर दक्षिण कोरिया की तरफ़ से बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा है. दक्षिण कोरिया अमरीका से कह रहा है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया पर अपने आक्रामक रुख में थोड़ी नरमी लाएं.

दक्षिण कोरिया को डर है कि अगर ग़लती से युद्ध छिड़ जाता है तो शरुआती आधे-एक घंटे में राजधानी सोल में लाखों लोग मारे जा सकते हैं. दक्षिण कोरिया की आबादी का बड़ा हिस्सा राजधानी सोल और उसके आस-पास रहता है.

Source Bbc

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