रीड से जुडी समस्याए और बचाव के तरीके

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स्पॉन्डिलाइटिस (Spondylitis) की समस्या देश में युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। अस्वस्थ जीवनशैली और गलत ढंग से बैठना इसका प्रमुख कारण है जैसे मांसपेशियां पूरी तरह रिलैक्स हैं और सारा वजन हड्डियों और जोड़ों पर है तो यह तकलीफ़ हो सकती है। उद्योगों में काम करने वाले वे कर्मचारी जो हमेशा चलते-फिरते रहते हैं, उन्हें स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या नहीं होती है। स्पॉन्डिलाइटिस रीढ़ की हड्डी (Reed KI Haddi) से जुड़ी सबसे आम समस्या है। यह रीढ़ की हड्डी की तकलीफ एवं बढ़ती उम्र की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसमें डीजेनरेटिव डिस्क और जॉइंट डिफॉर्मिटी दोनों शामिल हैं। पीठ एवं गर्दन का दर्द किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकते हैं लेकिन सामान्यतः 35 से 55 वर्ष के वयस्कों में यह काफी आम है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 25 से 35 साल के 30 से 50 फीसदी युवा जो जॉब में हैं उन्हें स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या है। हाल के अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि कोयले के भूमिगत खदानों में लगातार झुककर काम करने वाले श्रमिकों में यह बीमारी बहुत आम है। इन जगहों की लगभग दो तिहाई जनसंख्या रीढ़ की बीमारी से ग्रसित है और उन्हें डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता है। अधिकांश रोगी इस बीमारी के पारम्परिक इलाज से लाभान्वित हो सकते हैं। इसमें महंगी जांच और सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती।।

स्पॉन्डिलाइटिस के मुख्य कारण :

  • निष्क्रीय जीवनशैली।
  • धूम्रपान।
  • ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना।
  • उठने-बैठने में गलत पॉश्चर।
  • मोटापा।
  • मोबाइल, टैब चलाते समय बैठने-लेटने में पॉश्चर का ध्यान न रखना।
  • लंबी ड्राइविंग एवं कंप्यूटर पर काम करते वक़्त गर्दन को ऊपर न उठाना शामिल है।

उपचार के तरीके:
अल्ट्रासाउंड हाई फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन फॉर क्रॉनिक या पुराने दर्द के लिए। एक्युपंचर और योग। मिनिमल इनवेसिव स्पाइनल सर्जरी। इंडोस्कोपिक स्पाइनल सर्जरी हाइपर बेरिक ऑक्सीजन थैरेपी।।

स्टेम सेल थेरेपी :
हाल के अध्ययनों में ऐसा पाया है कि स्टेम सेल का उपयोग प्राकृतिक परिवर्तन के रूप में किया जा सकता है। ऐसी मान्यता है की स्टेम सेल्स क्षतिग्रस्त नर्व को दुबारा जीवित कर सकते हैं।

बचाव के तरीके;

  • हमेशा उचित तरीके से बैठना एवं खड़े होना चाहिए।
  • गैजेट्स का प्रयोग करते समय पॉश्चर का ध्यान रखना चाहिए।
  • नियमित व्यायाम करना चाहिए।
  • शारीरिक वजन को नियंत्रित रखना चाहिए।
  • भार उठाते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

समस्या दूर करने में मददगार :
स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या से मुकाबला करने में व्यायाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग और हल्के स्ट्रेचिंग व्यायाम नियमित रूप से 10 मिनट किए जाएं तो दर्द दूर करने में काफी मदद मिलती है।
20 मिनट तक ब्रिस्क वॉक की जाए तो उससे भी काफी फायदा मिलता है। पावर योगा भी इस समस्या से निपटने के लिए किया जाता है लेकिन इसमें इसमें सावधानी बरतना जरूरी है वरना कमर दर्द की समस्या बढ़ सकती है। बहुत ज्यादा जिमिंग, कार्डियो या वेट लिफ्टिंग करने से भी कमर दर्द बढ़ सकता है।

आहार के संबंध में ये सावधानी :
ऐसा आहार जो मोटापा या वजन बढ़ाता है उसे खाने से बचना चाहिए। अधिक वसा और तेल वाले भोजन से दूर रहना चाहिए। रोजाना के आहार में नमक का प्रयोग करते समय सावधानी रखना चाहिए। आहार में अधिक सोडियम द्रव्य को बढ़ा सकता है। एंटी ऑक्सीडेंट्स युक्त आहार जैसे फल-सब्जियां और सूखे मेवे का नियमित सेवन करने से राहत मिलती है।

पॉश्चर में इन बातों का ध्यान रखिए:
खड़े होते समय कोई भी पॉश्चर ठीक है लेकिन जब बैठते हैं तो सिर और कूल्हे एक ही लाइन में होना चाहिए। एक ही स्थिति में लंबे समय तक नहीं बैठना चाहिए। कुर्सी पर बैठे हैं तो एक घंटे में एक बार जरूर थोड़े समय के लिए उठकर चहलकदमी करनी चाहिए। बिस्तर पर पढ़ते या बैठते समय सही ढंग से बैठना चाहिए। अधलेटी अवस्था में पढ़ने या लैपटॉप पर काम करने से बचना ही बेहतर।।