एंटीबायोटिक्स के साइड इफेक्ट से बचने के लिए प्राकृतिक एंटीबायोटिक्स लें

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बीमारियों से लड़ने के लिए डॉक्टर्स एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देते हैं लेकिन इनका स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव भी होता है। ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस एनएचएस के मुताबिक एंटीबायोटिक्स लेने वाले 10 में से 1 व्यक्ति को पाचन संबंधी समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए जितना अधिक हो सके प्राकृतिक रूप से एंटीबायोटिक्स लेना चाहिए..

बैक्टीरिया से लड़ने में प्रभावी लहसुन :
विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि लहसुन अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया से लड़ने में प्रभावी ढंग से काम करता है। इसके अलावा इसे कई बीमारियों में दवा के रूप में भी प्रयोग करते हैं। इसे नियमित खाएं तो बीमारियों से दूर रहने में मदद मिलेगी।

मरहम के रूप में प्रयोग होता शहद :
अरस्तु के दौर में शहद का प्रयोग किसी धाव को भरने और इंफेक्शन से बचाने के लिए मरहम के रूप में करते थे। कई अध्ययन से पता चला है कि यह छाले, जलने, स्किन ट्रांसप्लांट में भी राहत देता है। इसमें हाइड्रोजन परऑक्साइड प्राकृतिक रूप से होता है।

ब्लड शुगर भी नियंत्रित करती अदरक:
प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में अदरक भी प्रभावी है। कई अध्ययनों से पता चला है। कि यह बैक्टीरिया के अलग-अलग तत्वों को नष्ट करने में मददगार है। लो ब्लड शुगर और मितली की समस्या में भी इससे राहत मिलती है।

लौंग का पानी बैक्टीरिया नष्ट करने में सहायक :
दांतों संबंधी समस्याओं को दूर करने में लौंग का प्रयोग लंबे समय से किया जाता है। लेकिन हाल में अध्ययनों से पता चला है कि लौंग को उबालकर उस पानी का प्रयोग बैक्टीरिया को नष्ट करने में प्रभावी है।

प्रभावी है अजवाइन :
ऑरिगेनो यानी अजवाइन की पत्ती इम्यूनिटी को बढ़ाती है। इसमें सूजन कम करने वाले तत्व भी होते हैं। यह प्रभावी एंटीबायोटिक है। अजवाइन या उसके तेल का प्रयोग भी एंटीबायोटिक के रूप में होता है।