लगातार विरोध और सुर्खियों में ट्रम्प का विवादास्पद फैसला

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येरुशलम को इज़रायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के ट्रंप के फैसले का विरोध ना सिर्फ मुस्लिम देशों में हो रहा है बल्कि ब्रिटेन, रूस, कनाडा, चीन, जर्मनी फ्रांस समेत कई बड़े देशों ने भी इसका विरोध किया है. पाकिस्तानी मिडिया ने भी इसकी घोर निंदा करते हुए लिखा हैं कि, अमेरिका इज़रायल के लिए करोड़ों मुसलमानों मुस्लिम देशों का विरोध कोई मायने नहीं रखता. जब तक ट्रंप अपना फैसला वापस नहीं लेते, तब तक फलस्तीन में हालात सामान्य नहीं होंगे. फलस्तीनियों ने जो नयी मुहिम शुरू की है, वह समय के साथ तेज होती जाएगी अगर इज़रायल की सेना से छड़प होती है, तो फलस्तीनियों की मौतों में भी इजाफा होता चला जाएगा.

एक अन्य अख़बार के मुताबिक अब वक्त आ गया है कि मुसलमान इस संवेदनशील मसले पर ठंडे दिल दिमाग से सोच कर रणनीति बनाएं. अखबार एक तरफ मुस्लिम देशों से अपनी सामूहिक कमजोरी की पहचान करने के लिए थिंकटैंक बनाने को कहता है, वहीं अमेरिका इज़रायल के राजनयिक बहिष्कार अरबों को शाह फैसल की तरह तेल को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की नसीहत देता है.

गौरतलब है कि अरब देशो में भी मामला बहुत गरमाया हुआ है, विरोध कि साथ-साथ अमेरिका को परिणाम भुगतने तक कि धमकी भी दी जा रही है.

Source Dailyhunt

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